शुक्रवार 22 मई 2026 - 14:12
अबा अब्दिल्लाहिल हुसैन (अ) के चाहने वालों के लिए इमाम सादिक (अ) की सलाह

इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत और उन पर सलाम भेजने की अहमयत इतना अधिक है कि उसे न बयान के दायरे में समेटा जा सकता है और न ही कलम उसे लिखने की ताकत रखता है। चाहे तुम उनकी कब्र के पास हो या दूर, तुम्हारा ख़ालिस सलाम उन तक पहुँचता है। और यही वह बेहद ऊँची शान है जो चाहने वालों को कल्पना के पार मुकाम की ओर बुलाती है।"

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, शेख कुलैनी (र) द्वारा लिखित 'उसूल-ए-काफ़ी' नामक किताब में इमाम सादिक (अ) से एक रिवायत नकल की गई है जो इमाम हुसैन (अ) के चाहने वालों के लिए बहुत मूल्यवान सलाह है।

हुसैन बिन सुवैर ने बताया:

عَنِ الْحُسَیْنِ بْنِ ثُوَیْرٍ قَالَ: کُنْتُ أَنَا وَ یُونُسُ بْنُ ظَبْیَانَ وَ الْمُفَضَّلُ بْنُ عُمَرَ وَ أَبُو سَلَمَهَ السَّرَّاجُ جُلُوساً عِنْدَ أَبِی عَبْدِ اللَّهِ عَلَیهِ السَّلامُ، وَ کَانَ الْمُتَکَلِّمُ مِنَّا یُونُسَ وَ کَانَ أَکْبَرَنَا سِنّاً. فَقَالَ لَهُ: جُعِلْتُ فِدَاکَ، إِنِّی کَثِیراً مَا أَذْکُرُ الْحُسَیْنَ عَلَیهِ السَّلامُ، فَأَیَّ شَیْ‌ءٍ أَقُولُ؟

فَقَالَ: قُلْ: «صَلَّی اللَّهُ عَلَیْکَ یَا أَبَاعَبْدِ اللَّهِ»

تُعِیدُ ذَلِکَ ثَلَاثاً، فَإِنَّ السَّلَامَ یَصِلُ إِلَیْهِ مِنْ قَرِیبٍ وَ مِنْ بَعِید. 

अनिल हुसैन बिन सुवैर क़ालाः कुंतो अना व यूनुस बिन ज़बयान वल मुफ़ज़्ज़ल बिन उमर व अबू सलमा सर्राज जुलूसन अबि अब्दिल्लाह अलैहिस सलाम, व कानल मुतकल्लेमो मिन्ना यूनुसा व काना अकबरना सिन्नन। फ़क़ाला लहूः जोइल्तो फ़िदाका, इन्नी कसीरन मा अज़कोरुल हुसैना अलैहिस सलामो, फ़अय्या शैइन अक़ोलो

फ़कालाः क़ुल सल लल्लाहो अलैका या अबा अब्दिल्लाह

तोईदो ज़ालेका सलासन, फ़इन्नस सलामो यसेलो इलैहे मिन क़रीबिन व मिन बईदिन।

"मैं, यूनुस बिन ज़बयान, मुफ़ज़्ज़ल बिन उमर और अबू सलमा सर्राज, इमाम सादिक (अ) की सेवा में बैठे थे। हम में से यूनुस बात कर रहे थे और वह उम्र में हम सबसे बड़े थे। उन्होंने इमाम से अर्ज़ किया:
'आप पर कुर्बान, मैं बहुत अधिक इमाम हुसैन (अ.) को याद करता हूँ। (ऐसे में) मैं क्या कहूँ?'

इमाम ने फरमाया:
'कहो: सल लल्लाहो अलैका या अबा अब्दिल्लाह
इसे तीन बार दोहराओ। क्योंकि यह सलाम उन तक पहुँचता है, चाहे निकट से हो या दूर से।'"

अल-काफ़ी, भाग 4, पेज 575

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha